श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.57.16 
स राजमार्गमध्येन सुमन्त्र: पिहितानन:।
यत्र राजा दशरथस्तदेवोपययौ गृहम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सुमन्तराम मुख पर कपड़ा बाँधकर राजमार्ग पर चलते हुए रथ लेकर उस महल में गए जहाँ राजा दशरथ उपस्थित थे॥16॥
 
Sumantram covered his face with a cloth as he walked down the highway. He took his chariot and went to the palace where King Dasharatha was present.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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