श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.57.12 
शुश्राव च वचस्तेषां वृन्दं वृन्दं च तिष्ठताम्।
हता: स्म खलु ये नेह पश्याम इति राघवम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सुमन्तराम ने उनकी बातचीत सुनी। वे समूह में खड़े होकर कहने लगे, 'हाय! हम अवश्य ही मारे गए, क्योंकि अब हम यहाँ श्री रामचन्द्रजी के दर्शन नहीं कर सकेंगे॥ 12॥
 
Sumantram heard their conversation. They stood in groups and said, 'Alas! We have surely been killed, because now we will not be able to see Shri Ramchandraji here.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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