श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.57.1 
कथयित्वा तु दु:खार्त: सुमन्त्रेण चिरं सह।
रामे दक्षिणकूलस्थे जगाम स्वगृहं गुह:॥ १॥
 
 
अनुवाद
इधर, जब श्रीराम गंगा के दक्षिणी तट पर उतरे, तब शोक से व्याकुल गुह ने सुमन्त्र से बहुत देर तक बातें कीं। इसके बाद वे सुमन्त्र को साथ लेकर अपने घर चले गए॥1॥
 
Here, when Shri Ram landed on the southern bank of the Ganges, Guha, distraught with grief, talked with Sumantram for a long time. After this, he took Sumantram along with him and went back to his home.॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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