श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.56.8 
पश्य द्रोणप्रमाणानि लम्बमानानि लक्ष्मण।
मधूनि मधुकारीभि: सम्भृतानि नगे नगे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
(तब उन्होंने लक्ष्मण से कहा-) 'लक्ष्मण! देखो, यहाँ प्रत्येक वृक्ष पर मधुमक्खियों द्वारा लगाए और पोषित किए गए मधुकोष कैसे लटक रहे हैं। इनमें से प्रत्येक में एक द्रोण (लगभग सोलह सेर) शहद भरा हुआ है।'
 
(Then he said to Lakshmana-) 'Laxmana! Look, how the honeycombs planted and nourished by the bees are hanging on each tree here. Each of these is filled with one drona (about sixteen seers) of honey.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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