श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.56.4 
तत उत्थाय ते सर्वे स्पृष्ट्वा नद्या: शिवं जलम्।
पन्थानमृषिभिर्जुष्टं चित्रकूटस्य तं ययु:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
फिर सब लोग उठे, यमुना नदी के शीतल जल में स्नान किया और फिर ऋषि-मुनियों से सेवित चित्रकूट के मार्ग पर चल पड़े।
 
Then everyone got up, took a bath in the cool water of the Yamuna river and then set out on the road to Chitrakoot served by sages and saints.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd