vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश
»
श्लोक 30
श्लोक
2.56.30
इष्ट्वा देवगणान् सर्वान् विवेशावसथं शुचि:।
बभूव च मनोह्लादो रामस्यामिततेजस:॥ ३०॥
अनुवाद
समस्त देवताओं का पूजन करके शुद्ध भाव से श्री रामजी ने कुटिया में प्रवेश किया। उस समय अत्यंत तेजस्वी श्री रामजी को बड़ा आनन्द हुआ।
After worshipping all the gods, Shri Ram entered the hut with pure intentions. At that time, the extremely radiant Shri Ram felt very happy.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd