श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.56.26 
स लक्ष्मण: कृष्णमृगं हत्वा मेध्यं प्रतापवान्।
अथ चिक्षेप सौमित्रि: समिद्धे जातवेदसि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रा के पुत्र पराक्रमी लक्ष्मण ने पवित्र काले चमड़े वाली हाथी की जड़ उखाड़कर उसे प्रज्वलित अग्नि में फेंक दिया॥26॥
 
The mighty Lakshmana, son of Sumitra, uprooted the sacred black-skinned elephant root and threw it into the blazing fire.॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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