श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.56.20 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा सौमित्रिर्विविधान् द्रुमान्।
आजहार ततश्चक्रे पर्णशालामरिंदम:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के ये वचन सुनकर शत्रुदमन और लक्ष्मण ने विभिन्न वृक्षों की शाखाएँ काटकर उनके पत्तों का एक छप्पर बनाया।
 
On hearing these words from Shri Rama, Shatrudaman and Lakshmana cut branches of various trees and made a shed of leaves using them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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