श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 56: श्रीराम आदि का चित्रकूट में पहुँचना, वाल्मीकिजी का दर्शन करके श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मणद् वारा पर्णशाला का निर्माण,सबका कुटी में प्रवेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.56.12 
ततस्तौ पादचारेण गच्छन्तौ सह सीतया।
रम्यमासेदतु: शैलं चित्रकूटं मनोरमम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सीताजी के साथ पैदल यात्रा करते हुए श्री राम और लक्ष्मण दोनों भाई समय आने पर सुन्दर एवं मनोरम चित्रकूट पर्वत पर पहुँचे॥ 12॥
 
Travelling on foot with Sita, both brothers Sri Rama and Lakshmana reached the beautiful and picturesque mountain Chitrakoot in due time.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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