श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.55.8 
क्रोशमात्रं ततो गत्वा नीलं प्रेक्ष्य च काननम्।
सल्लकीबदरीमिश्रं रम्यं वंशैश्च यामुनै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्यामवट से एक कोस दूर जाओगे तो नीला जंगल दिखेगा; चीड़ और बेर के पेड़ भी हैं। यमुना के किनारे लगे बाँसों की वजह से यह और भी सुंदर लगता है।
 
‘If you go one kos away from Shyamvat, you will see the blue forest; there are pine and jujube trees as well. It looks even more beautiful because of the bamboos that grow on the banks of the Yamuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)