| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना » श्लोक 6-7 |
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| | | | श्लोक 2.55.6-7  | ततो न्यग्रोधमासाद्य महान्तं हरितच्छदम्।
परीतं बहुभिर्वृक्षै: श्यामं सिद्धोपसेवितम्॥ ६॥
तस्मिन् सीताञ्जलिं कृत्वा प्रयुञ्जीताशिषां क्रियाम्।
समासाद्य च तं वृक्षं वसेद् वातिक्रमेत वा॥ ७॥ | | | | | | अनुवाद | | 'इसके बाद आगे जाकर तुम्हें एक बहुत बड़ा बरगद का वृक्ष मिलेगा, जिसके पत्ते हरे रंग के हैं। वह चारों ओर से अनेक वृक्षों से घिरा हुआ है। उस वृक्ष का नाम श्यामवट है। उसकी छाया में अनेक सिद्ध पुरुष निवास करते हैं। वहाँ पहुँचकर सीता को उस वृक्ष से हाथ जोड़कर आशीर्वाद माँगना चाहिए। यात्री चाहे तो उस वृक्ष के पास जाकर कुछ देर वहाँ रुक सकता है या वहाँ से आगे बढ़ सकता है।' 6-7 | | | | ‘After that, going further, you will find a very big banyan tree, whose leaves are of green colour. It is surrounded by many other trees from all sides. The name of that tree is Shyamvat. Many accomplished men live under its shade. On reaching there, Sita should request blessings from that tree with folded hands. If the traveller wishes, he can go near that tree and stay there for some time or move ahead from there. 6-7. | | ✨ ai-generated | | |
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