श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.55.4 
गङ्गायमुनयो: संधिमासाद्य मनुजर्षभौ।
कालिन्दीमनुगच्छेतां नदीं पश्चान्मुखाश्रिताम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषश्रेष्ठ! तुम दोनों भाई गंगा और यमुना के संगम पर पहुँचकर महानदी यमुना के पास जाओ, जहाँ गंगा पश्चिम की ओर मुख करके यमुना में मिलती है।
 
'Best of men! You two brothers, after reaching the confluence of Ganga and Yamuna, go near the great river Yamuna, where Ganga joins the river facing west.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd