श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.55.3 
तत: प्रचक्रमे वक्तुं वचनं स महामुनि:।
भरद्वाजो महातेजा रामं सत्यपराक्रमम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महर्षि भरद्वाज महाबली श्री राम से इस प्रकार कहने लगे -
 
Thereafter, the great sage Bharadwaja started saying to the truly mighty Shri Ram in this manner –
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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