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ramayan 2.55.29: असहाय सीता प्रत्येक वृक्ष, झाड़ी या पुष्प-सज्जित लता को देखतीं, जिसे उन्होंने पहले नहीं देखा था और श्री राम से उसके बारे में पूछतीं।   |   ramayan सर्ग 2.55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.55.29 
एकैकं पादपं गुल्मं लतां वा पुष्पशालिनीम्।
अदृष्टरूपां पश्यन्ती रामं पप्रच्छ साऽबला॥ २९॥
 
 
अनुवाद
असहाय सीता प्रत्येक वृक्ष, झाड़ी या पुष्प-सज्जित लता को देखतीं, जिसे उन्होंने पहले नहीं देखा था और श्री राम से उसके बारे में पूछतीं।
 
Helpless Sita would look at each tree, bush or flower-decorated creeper that she had not seen before and would ask Sri Rama about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)