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ramayan 2.55.27: हे भरत के छोटे भाई, हे महापुरुष लक्ष्मण! तुम सीता को साथ लेकर आगे बढ़ो और मैं धनुष धारण करके तुम सबकी रक्षा करता हुआ पीछे-पीछे चलूँगा॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 2.55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.55.27 
सीतामादाय गच्छ त्वमग्रतो भरतानुज।
पृष्ठतोऽनुगमिष्यामि सायुधो द्विपदां वर॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे भरत के छोटे भाई, हे महापुरुष लक्ष्मण! तुम सीता को साथ लेकर आगे बढ़ो और मैं धनुष धारण करके तुम सबकी रक्षा करता हुआ पीछे-पीछे चलूँगा॥ 27॥
 
'O great man Lakshmana, younger brother of Bharata! You go ahead with Sita along with you and I will walk behind holding the bow and protecting you all.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)