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अवलोक्य तत: सीतामायाचन्तीमनिन्दिताम्।
दयितां च विधेयां च रामो लक्ष्मणमब्रवीत्॥ २६॥
अनुवाद
सदैव अपनी आज्ञा में रहने वाली प्रिय, पतिव्रता और सदाचारिणी स्त्री सीता को श्यामवत से आशीर्वाद मांगते देख भगवान राम ने लक्ष्मण से कहा-॥26॥
Seeing Sita, the beloved, chaste and virtuous woman who always remained under his command, seeking blessings from Shyamvat, Lord Rama said to Lakshman -॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥