श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.55.26 
अवलोक्य तत: सीतामायाचन्तीमनिन्दिताम्।
दयितां च विधेयां च रामो लक्ष्मणमब्रवीत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सदैव अपनी आज्ञा में रहने वाली प्रिय, पतिव्रता और सदाचारिणी स्त्री सीता को श्यामवत से आशीर्वाद मांगते देख भगवान राम ने लक्ष्मण से कहा-॥26॥
 
Seeing Sita, the beloved, chaste and virtuous woman who always remained under his command, seeking blessings from Shyamvat, Lord Rama said to Lakshman -॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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