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ramayan 2.55.10: जब महर्षि भरद्वाज मार्ग बताकर लौटने लगे, तब श्री राम ने उनके चरणों में प्रणाम करके “तथास्तु” कहा और कहा - “अब आप कृपा करके आश्रम को लौट जाइए।”॥10॥   |   ramayan सर्ग 2.55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 55: श्रीराम आदि का अपने ही बनाये हुए बेडे से यमुनाजी को पार करना, सीता की यमुना और श्यामवट से प्रार्थना,यमुनाजी के समतल तट पर रात्रि में निवास करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.55.10 
इति पन्थानमादिश्य महर्षि: संन्यवर्तत।
अभिवाद्य तथेत्युक्त्वा रामेण विनिवर्तित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब महर्षि भरद्वाज मार्ग बताकर लौटने लगे, तब श्री राम ने उनके चरणों में प्रणाम करके “तथास्तु” कहा और कहा - “अब आप कृपा करके आश्रम को लौट जाइए।”॥10॥
 
When Maharishi Bharadwaj started returning after showing the way, then Shri Ram bowed at his feet saying "Tathastu" and said - "Now you please return to the Ashram."॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)