श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.54.8 
धन्विनौ तौ सुखं गत्वा लम्बमाने दिवाकरे।
गङ्गायमुनयो: संधौ प्रापतुर्निलयं मुने:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बातें करते हुए दोनों वीर धनुर्धर श्री राम और लक्ष्मण सूर्यास्त के समय गंगा और यमुना के संगम के निकट मुनिवर भरद्वाज के आश्रम पर पहुँचे॥8॥
 
While talking like this, both the brave archers Shri Ram and Lakshman reached the ashram of Munivar Bhardwaj near the confluence of Ganga and Yamuna by sunset. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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