श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.54.29 
गोलाङ्गूलानुचरितो वानरर्क्षनिषेवित:।
चित्रकूट इति ख्यातो गन्धमादनसंनिभ:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'उस पर बहुत से वानर विचरण करते हैं। बन्दर और भालू भी वहाँ रहते हैं। वह पर्वत चित्रकूट नाम से प्रसिद्ध है और गंधमादन के समान सुन्दर है।
 
‘Many monkeys roam around on it. Monkeys and bears also live there. That mountain is famous by the name of Chitrakoot and is as beautiful as Gandhamadan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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