श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.54.27 
एतच्छ्रुत्वा शुभं वाक्यं भरद्वाजो महामुनि:।
राघवस्य तु तद् वाक्यमर्थग्राहकमब्रवीत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के ये शुभ वचन सुनकर महर्षि भरद्वाज ने कुछ ऐसा कहा जिससे उनका कहा हुआ उद्देश्य सिद्ध हो गया -॥27॥
 
On hearing these auspicious words of Sri Rama, the great sage Bharadwaj said something that would enable him to achieve his stated objective -॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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