श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.54.23 
एवमुक्तस्तु वचनं भरद्वाजेन राघव:।
प्रत्युवाच शुभं वाक्यं राम: सर्वहिते रत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब भरद्वाज मुनि ने ऐसा कहा, तब समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहने वाले रघुकुलनन्दन श्री राम ने इन शुभ वचनों से उन्हें उत्तर दिया-॥23॥
 
When Bhardwaj Muni said this, Raghukulnandan Shri Ram, who is always ready for the welfare of all living beings, replied to him with these auspicious words – ॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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