श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.54.22 
अवकाशो विविक्तोऽयं महानद्यो: समागमे।
पुण्यश्च रमणीयश्च वसत्विह भवान् सुखम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘गंगा और यमुना इन दो महान नदियों के संगम के निकट स्थित यह स्थान अत्यंत पवित्र और एकांत है। यहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य भी मनमोहक है, अतः तुम यहाँ सुखपूर्वक निवास करो।’॥22॥
 
‘This place near the confluence of the two great rivers Ganga and Yamuna is very sacred and secluded. The natural beauty here is also captivating, so you should live here happily.’॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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