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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन
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श्लोक 17
श्लोक
2.54.17
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राजपुत्रस्य धीमत:।
उपानयत धर्मात्मा गामर्घ्यमुदकं तत:॥ १७॥
अनुवाद
परम बुद्धिमान राजकुमार श्री रामजी के वे वचन सुनकर धर्मात्मा भरद्वाज मुनि ने उन्हें आतिथ्यस्वरूप एक गौ और अर्घ्य जल प्रदान किया॥17॥
Hearing those words of the most intelligent Prince Shri Ram, the pious Bhardwaj Muni offered a cow and arghya water to him as hospitality. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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