श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 54: लक्ष्मण और सीता सहित श्रीराम का भरद्वाज-आश्रम में जाना, मुनि का उन्हें चित्रकूट पर्वत पर ठहरने का आदेश तथा चित्रकूट की महत्ता एवं शोभा का वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.54.16 
पित्रा नियुक्ता भगवन् प्रवेक्ष्यामस्तपोवनम्।
धर्ममेवाचरिष्यामस्तत्र मूलफलाशना:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! इस प्रकार पिता की आज्ञा से हम तीनों तपस्विनी वन में जाएँगे और वहाँ फल-मूल खाकर धर्म का पालन करेंगे।'॥16॥
 
'Lord! Thus, by father's order, we three will go to the forest of penance and there we will follow the religion by eating fruits and roots.'॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd