श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.53.9 
इदं व्यसनमालोक्य राज्ञश्च मतिविभ्रमम्।
काम एवार्थधर्माभ्यां गरीयानिति मे मति:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'मुझ पर आई हुई विपत्ति और राजा की उलझन को देखकर मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि धन और धर्म की अपेक्षा काम अधिक महत्त्वपूर्ण है ॥9॥
 
'Seeing the calamity that has befallen me and the king's confusion, it seems to me that lust is more important than wealth and religion. ॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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