श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.53.6 
ध्रुवमद्य महाराजो दु:खं स्वपिति लक्ष्मण।
कृतकामा तु कैकेयी तुष्टा भवितुमर्हति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! आज राजा अवश्य ही बड़े दुःख में सो रहे होंगे; किन्तु कैकेयी अवश्य ही बहुत संतुष्ट होंगी, क्योंकि उनकी मनोकामना पूरी हो गई।
 
Lakshmana! Today the king must surely be sleeping in great sorrow; but Kaikeyi must be very satisfied as her wish has been fulfilled.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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