श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.53.5 
स तु संविश्य मेदिन्यां महार्हशयनोचित:।
इमा: सौमित्रये रामो व्याजहार कथा: शुभा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी, जो बहुमूल्य शय्या पर शयन करने योग्य थे, भूमि पर ही बैठे हुए सुमित्रापुत्र लक्ष्मण से ये शुभ वचन कहने लगे-॥5॥
 
Sri Rama, who was worthy of sleeping on a precious bed, sitting on the ground itself, began speaking these auspicious words to Sumitra's son Lakshmana -*॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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