श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.53.26 
अधर्मभयभीतश्च परलोकस्य चानघ।
तेन लक्ष्मण नाद्याहमात्मानमभिषेचये॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'भोले लक्ष्मण! मैं पाप से और परलोक के भय से भयभीत हूँ; इसीलिए आज अयोध्या का राजा पद पर अपना अभिषेक नहीं करवा रहा हूँ।'॥26॥
 
'Innocent Lakshmana! I am afraid of sin and the fear of the other world; that is why I am not getting myself anointed as the king of Ayodhya today.'॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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