श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.53.24 
अल्पभाग्या हि मे माता कौसल्या रहिता मया।
शेते परमदु:खार्ता पतिता शोकसागरे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'मेरे वियोग में माता कौशल्या साक्षात् असहाय स्त्री हो गई हैं और दुःख के सागर में गिरकर महान दुःख से भरी हुई उसी में सोती हैं।
 
'Because of being separated from me, Mother Kausalya has actually become a helpless woman and after falling into the ocean of sorrow, she sleeps in it, filled with great sorrow.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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