श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.53.10 
को ह्यविद्वानपि पुमान् प्रमदाया: कृते त्यजेत्।
छन्दानुवर्तिनं पुत्रं तातो मामिव लक्ष्मण॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'लक्ष्मण! जिस प्रकार मेरे पिता ने मुझे त्याग दिया है, ऐसा कौन पुरुष होगा, जो पूर्ण अज्ञानी होने पर भी, अपने आज्ञाकारी पुत्र को स्त्री के लिए त्याग देगा?॥10॥
 
'Lakshmana! The way my father has abandoned me, who would be such a man, even if he is completely ignorant, who would abandon his obedient son for a woman?॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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