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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
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श्लोक 99
श्लोक
2.52.99
श्रुत्वा रामस्य वचनं प्रतस्थे लक्ष्मणोऽग्रत:।
अनन्तरं च सीताया राघवो रघुनन्दन:॥ ९९॥
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी के ये वचन सुनकर लक्ष्मण आगे बढ़े। सीता उनके पीछे-पीछे चलने लगीं और सीता के पीछे रघुकुलनन्दन श्री रामजी थे॥99॥
Hearing these words of Shri Ramchandraji, Lakshman moved forward. Sita started following him and behind Sita was Raghukulnandan Shri Ram. 99॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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