श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.52.97 
न हि तावदतिक्रान्तासुकरा काचन क्रिया।
अद्य दु:खं तु वैदेही वनवासस्य वेत्स्यति॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
अभी कोई कठिन कार्य पूरा नहीं हुआ है; कठिनाइयाँ तो अभी आरम्भ हुई हैं। आज विदेहकुमारी सीता को वनवास का वास्तविक कष्ट अनुभव होगा॥ 97॥
 
‘No difficult task has been completed yet; the difficulties have only begun from this time. Today, Videha Kumari Sita will experience the real pain of exile.॥ 97॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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