श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.52.91 
पुनरेव महाबाहुर्मया भ्रात्रा च संगत:।
अयोध्यां वनवासात् तु प्रविशत्वनघोऽनघे॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
हे गंगा! हे महाबाहु, हे निष्पाप मेरे पतिदेव, मेरे और अपने भाई के साथ वनवास से लौटकर पुनः अयोध्या नगरी में प्रवेश करें॥ 91॥
 
'Sinless Ganga! May this mighty-armed, sinless husband of mine, return from his exile along with me and his brother and re-enter the city of Ayodhya.'॥ 91॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas