श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.52.9 
तवामरसुतप्रख्य तर्तुं सागरगामिनीम्।
नौरियं पुरुषव्याघ्र शीघ्रमारोह सुव्रत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे सिंह-पुरुष, हे देवपुत्र के समान तेजस्वी और उत्तम व्रतों का पालन करने वाले श्री राम! यह नाव समुद्र में बहती हुई गंगा नदी को पार करने के लिए आपकी सेवा में आई है। अब आप शीघ्र ही इस पर चढ़ जाइए।
 
'O lion-man, Shri Ram, who is as radiant as the son of God and who observes the best vows! This boat has come to your service to cross the sea-going river Ganga. Now you may board it quickly.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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