श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  2.52.89 
सुराघटसहस्रेण मांसभूतौदनेन च।
यक्ष्ये त्वां प्रीयतां देवि पुरीं पुनरुपागता॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
‘देवी! अयोध्यापुरी में लौटकर मैं देवताओं के लिए भी दुर्लभ सहस्रों वस्तुओं से तथा राजभाग से रहित पृथ्वी, वस्त्र और अन्न से आपकी पूजा करूँगा। आप मुझ पर प्रसन्न हों॥ 89॥
 
‘Goddess! On my return to Ayodhyapuri, I shall worship you with thousands of objects which are rare even for the gods and also with the earth, clothes and food which are devoid of the royal share. May you be pleased with me*॥ 89॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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