श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.52.88 
गवां शतसहस्रं च वस्त्राण्यन्नं च पेशलम्।
ब्राह्मणेभ्य: प्रदास्यामि तव प्रियचिकीर्षया॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
‘केवल इतना ही नहीं, मैं आपको प्रसन्न करने के लिए एक लाख गौएँ, बहुत से वस्त्र और उत्तम भोजन ब्राह्मणों को दूँगा ॥ 88॥
 
‘Not only this, to please you I will give one lakh cows, many clothes and the finest food to the Brahmins.॥ 88॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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