श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  2.52.87 
सा त्वां देवि नमस्यामि प्रशंसामि च शोभने।
प्राप्तराज्ये नरव्याघ्रे शिवेन पुनरागते॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
'हे सुन्दरी! जब सिंह-पुरुष श्री राम वन से सकुशल लौटकर अपना राज्य पुनः प्राप्त कर लेंगे, तब मैं सीता पुनः आपको सिर झुकाकर आपकी स्तुति करूंगी।
 
'Beautiful goddess! When the lion-man Shri Ram returns safely from the forest and regains his kingdom, then I, Sita, will once again bow my head to you and praise you.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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