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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
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श्लोक 84
श्लोक
2.52.84
चतुर्दश हि वर्षाणि समग्राण्युष्य कानने।
भ्रात्रा सह मया चैव पुन: प्रत्यागमिष्यति॥ ८४॥
अनुवाद
'पूरे चौदह वर्ष वन में निवास करने के पश्चात् वह मेरे और अपने भाई के साथ अयोध्यापुरी लौटेगा।
'After residing in the forest for a full fourteen years, he will return to Ayodhyapuri along with me and his brother.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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