श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.52.81 
ततस्तैश्चालिता नौका कर्णधारसमाहिता।
शुभस्फ्यवेगाभिहता शीघ्रं सलिलमत्यगात्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद नाविकों ने नाव चला दी। पतवार चलाने वाला बड़ी सावधानी से उसे चला रहा था। पतवार की तेज़ गति के कारण नाव पानी पर बहुत तेज़ी से चलने लगी। 81.
 
Thereafter the boatmen started the boat. The helmsman was steering it with great care. Due to the swift oar movement the boat started moving very fast on the water. 81.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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