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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
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श्लोक 8
श्लोक
2.52.8
तत: स प्राञ्जलिर्भूत्वा गुहो राघवमब्रवीत्।
उपस्थितेयं नौर्देव भूय: किं करवाणि ते॥ ८॥
अनुवाद
तब गुह ने हाथ जोड़कर श्री रामचन्द्रजी से कहा - 'प्रभो! यह नाव उपस्थित है; कहिए, इस समय मैं आपकी और क्या सेवा कर सकता हूँ?'॥8॥
Then Guha folded his hands and said to Shri Ramchandraji - 'Lord! This boat is present; tell me, what more service can I do for you at this time?॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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