श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  2.52.79 
आचम्य च यथाशास्त्रं नदीं तां सह सीतया।
प्रणमत्प्रीतिसंतुष्टो लक्ष्मणश्च महारथ:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
फिर शास्त्रविधि अनुसार आचमन करके सीतासहित उन्होंने प्रसन्न होकर गंगाजी को प्रणाम किया। महारथी लक्ष्मण ने भी उन्हें मस्तक नवाया॥79॥
 
Then after doing Aachman according to the scriptures, he along with Sita became happy and bowed to Gangaji. Maharathi Lakshman also bowed his head to him. 79॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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