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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
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श्लोक 77
श्लोक
2.52.77
अथारुरोह तेजस्वी स्वयं लक्ष्मणपूर्वज:।
ततो निषादाधिपतिर्गुहो ज्ञातीनचोदयत्॥ ७७॥
अनुवाद
अन्त में लक्ष्मण के बड़े भाई तेजस्वी श्री राम स्वयं नाव पर बैठ गए। तत्पश्चात निषादराज गुह ने अपने भाइयों को नाव चलाने का आदेश दिया ॥77॥
At the end of all, Laxman's elder brother Tejasvi Shri Ram himself sat on the boat. Thereafter Nishadraj Guh ordered his brothers to row the boat. 77॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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