श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  2.52.75 
आरोह त्वं नरव्याघ्र स्थितां नावमिमां शनै:।
सीतां चारोपयान्वक्षं परिगृह्य मनस्विनीम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
'मानसिंह! सामने एक नाव खड़ी है। तुम सीता को पकड़कर धीरे से उस पर बिठा लो, फिर तुम भी नाव पर बैठ जाओ।'
 
'Mansingh! There is a boat standing in front. You hold Sita and gently make her sit on it, then you also sit on the boat.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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