श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  2.52.74 
स तु दृष्ट्वा नदीतीरे नावमिक्ष्वाकुनन्दन:।
तितीर्षु: शीघ्रगां गङ्गामिदं वचनमब्रवीत्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
नदी के तट पर खड़ी हुई नाव को देखकर इक्ष्वाकुनन्दन श्री राम ने बहती हुई गंगा नदी को शीघ्र पार करने की इच्छा से लक्ष्मण को संबोधित करते हुए कहा- ॥74॥
 
Seeing the boat parked on the bank of the river, Ikshvakunandan Shri Ram addressed Lakshman with the desire to quickly cross the flowing river Ganga and said - ॥ 74॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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