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श्लोक 2.52.73  |
ततस्तं समनुज्ञाप्य गुहमिक्ष्वाकुनन्दन:।
जगाम तूर्णमव्यग्र: सभार्य: सहलक्ष्मण:॥ ७३॥ |
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| अनुवाद |
| गुह को यह आदेश देकर और उनसे विदा लेकर इक्ष्वाकुवंशी श्री रामचन्द्रजी अपनी पत्नी और लक्ष्मण सहित तुरन्त वहाँ से चले गये। उस समय उनके मन में लेशमात्र भी चिन्ता नहीं थी। 73. |
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| Having given this order to Guha and having taken leave from him, Ikshwaku clan's son Shri Ramchandraji along with his wife and Lakshman immediately left from there. At that time there was not even a trace of anxiety in his mind. 73. |
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