श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.52.72 
अप्रमत्तो बले कोशे दुर्गे जनपदे तथा।
भवेथा गुह राज्यं हि दुरारक्षतमं मतम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
‘निषाद्रराज! आपको सेना, कोष, दुर्ग और राज्य के विषय में सदैव सावधान रहना चाहिए; क्योंकि राज्य की रक्षा का कार्य अत्यन्त कठिन माना गया है ॥ 72॥
 
'King of Nishadras! You must always be cautious regarding the army, treasury, fort and the kingdom; because the task of protecting the kingdom is considered to be very difficult.'॥ 72॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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