श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.52.71 
ततो वैखानसं मार्गमास्थित: सहलक्ष्मण:।
व्रतमादिष्टवान् राम: सहायं गुहमब्रवीत्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वानप्रस्थ मार्ग का आश्रय लेकर श्री रामजी ने लक्ष्मण सहित वानप्रस्थोचित व्रत धारण किया। तत्पश्चात् उन्होंने अपने सहायक गुह से कहा - 71॥
 
Thereafter, taking shelter of Vanaprastha path, Shri Ram along with Lakshman took the vow of Vanaprasthochita. After that he said to his assistant Guh – 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)