श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.52.70 
तौ तदा चीरसम्पन्नौ जटामण्डलधारिणौ।
अशोभेतामृषिसमौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
उस समय दोनों भाई श्री राम और लक्ष्मण ने छाल के वस्त्र और जटाएँ धारण कर ली थीं और वे ऋषियों के समान दिख रहे थे। 70.
 
At that time both brothers Sri Rama and Lakshmana wore bark clothes and matted hair and looked like sages. 70.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas