श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.52.7 
तं निशम्य गुहादेशं गुहामात्यो गतो महान्।
उपोह्य रुचिरां नावं गुहाय प्रत्यवेदयत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
निषादराज गुह की आज्ञा सुनकर उनके मुख्य मंत्री ने घाट पर जाकर एक सुन्दर नाव भेजी, जिससे गुह को इसकी सूचना मिल सके।
 
On hearing the orders of Guha, the king of Nishādraja, his chief minister went and sent a beautiful boat to the ghat to inform Guha about this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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