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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 52: श्रीराम की आज्ञा से गुह का नाव मँगाना, श्रीराम का सुमन्त्र को समझाबुझाकर अयोध्यापुरी लौट जाने के लिये आज्ञा देना,सीता की गङ्गाजी से प्रार्थना
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श्लोक 65
श्लोक
2.52.65
इत्युक्त्वा वचनं सूतं सान्त्वयित्वा पुन: पुन:।
गुहं वचनमक्लीबो रामो हेतुमदब्रवीत्॥ ६५॥
अनुवाद
ऐसा कहकर श्री राम ने सुमन्तराम को बार-बार सान्त्वना दी और फिर उत्साहपूर्वक गुह से यह युक्तिसंगत बात कही -॥65॥
Having said this, Shri Ram consoled Sumantram again and again. After this, he told Guha enthusiastically the following logical thing -॥ 65॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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